Thursday, December 9, 2010

Farewell...

Farewell farewell
Said all as u leave
Hearts broken, friends lost
Come to you, too high a cost..
For all u did was toil,
Somewhere home, somewhere soil...
 You rose and bonds fell apart, those
 you made with such passion and art ...
but it’s time to move on,
to a new playground
people whistle and cheer as you arrive
such is your strength that they survive...


Wednesday, December 8, 2010

सपनो की बात ....



सपनो  में  अ  कर  छु  जाती  है .
होती  है  वो  बात  जो  नहीं  हो  पाई  है ...

सीने  में आज  भी  दबे  हुई  हैं  अरमान  
आग  जैसे  बुझ  के  अभी  ठंडी  नहीं  हुई  है .
उम्मीद  की  रख  के  नीचे  आज  भी  हैं  अंगारे ,
कुछ  सुलगे  हुए  कुछ  जलने  के  इंतज़ार  में ..

समय  का  एक  झोंका  आता  है  उठ  कर  कहीं  से ,
और  ले  आता  है  उनकी  एक  याद  ..
हटा  देता  है  जले  हों  को ,
निकल  लता  है  दबी  हुई  बात 

कोशिश  कर  चुका  हुईं  मैं  बहुत  पर ,
छलक  जाते  हैं  जैसे  सपने  भरी  हुई  गगरी  से ..
अपने  को  पाटा  हूँ  उनके  करीब  ,
देखा  करते  था  जिनको  दूर  से  ही ,
सिहरन  दौड़  जाती  थी  आँख  मिलते  ही ..
हर  बार  यही  सवाल  दोहराता  था ,
मिलेगी  क्या  मुझे  वो  जिसको  मैं  चाहता  था ?
और  आज  तक , सवाल  का  जवाब  सिर्फ  सपनो  में  मिला  है 
होती  वो  बात  है  जो  नहीं  हो  पाई  है ..



9-9-06
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तुम्हीं तुम हो ...

उस  खुदा  से  मेरी 
तुम्ही  रज़ा  हो , हर  आरज़ू  तुम  हो 
मेरा  हर  गम  बस  तुम्ही  तक , मेरी  हर  ख़ुशी  तुम्ही  हो 
मेरे  साथ  चलना , मेरा  साथ  देना , मेरी  कश्ती  तुम्ही  हो ....

वक़्त  ने  छीने  अपने  बहुत , और  कई  आरमान  मेरे 
उन  साबका  लौटाया  हुआ ..
सिला  तुम  हो , महफिल  तुम्ही  हो 
बस  मुझे  ही  देखो , मुझे  ही  सोचो , मेरा  साहिल  तुम्हीं  हो ....

थे  गम  के  बादल   फलक  पर  और  हवा  तन्हाई  सी  सर्द 
मिटाया  जिसने  ये 
अंधेरा  वो  तुम्हीं  हो , प्यार  की  बारिश  तुम्हीं  हो 
खुद  जलकर  राह  दिखाए  जो , मेरा  वो  आफताब  तुम्हीं  हो .....

तुम्हीं   तुम   हो  ...


28/03/10

मौका...

कर  वक़्त  बर्बाद  युहीं 
रोता  रहा  ज़िन्दगी  के  लिए 
निकल  गयी  वो  आँखों  के  सामने  से 
बिना  आहट  बस  पछताने  को  छोड़  के 
पर  पछताने  का  क्या  फायेदा  जब  
नया  मंजर  है  सामने  मेरे 
अच्छा  यही  की  आँखें  खोलूं  और  लागों  गले 
उस  पल  को  छोटा  सही  पर  बस  मेरे  लिए  रुका  है ,
शायद  मेरी  नाव  पार  लगाने  का  यही  एक  मौका  है .....



08/12/06

मौत ...

सत्य  को  असत्य  में  परिवर्तित  कर 
कब  तक  छुपेगा  मनुष्य 
वोह  तो  आएगी , एक  पल  में  कब 
बिना  आहत , अपने  मंज़र  छोड़  जाने  के  लिए 
भागता  रहेगा  जिससे  हर  पल 
इस  भौतिक  संसार  की  खुशियों  में , बन्धनों  में 
गोते  लगा  रहा  होगा 
तब  वहीँ  पर  अपने  संग  डूबा  ले  चलेगी ...





08/07/2005

निर्मल...

निर्मल  सपनो  की  बस्ती  से  निकल  आया  हूँ ,
मलिन  असत्य  के  शहर  में .
सुन्दर  उजली  दुनिया  से  दामन  छूटा  तोह  पाया ,
खुद  को  इस  अँधेरे  जंगल  में .
रात  कटती  न  जहाँ  बिना  सहारे ,
न  दिखते  सूरज , चाँद  या  तारे ....
किसको  गिनकर  रात  गुज़ारूँ .
रातभर  मैं , यह  सोचकर  जागूँ ..
आँख  लगी  तोह  खुद  को  पाया ,
सपनो  की  उसी  बस्ती  में ..
जहाँ  का  सूरज  कभी  न  ढलता .
समय  भी  थोडा  सुस्ता  कर  चलता 
दूर  क्षितिज  में  चाँद  भी  जलता 
और  मेरा  स्वप्न  है  पलता .

निर्मल 
=====23/07/02

समझ ...

ज़िन्दगी  को  कुछ  दूर  तक 
समझा  हूँ  आज .
जो  थे  मेरे  अपने 
वे  ही  नहीं  हैं  मेरे  साथ 
दूर  खड़े  हैं  वोह  मुझसे 
जो  थे  कभी  मेरे  पास 
समझ  न  पाया  उनके  मन  को 
जब  थे  साथ - साथ 
मन  का  कौटिल्य  आज 
खेल  गया  अपनी  बिसात 
जिनकी  हर  भावना  का  किया  सम्मान
वे  ही  कर  रहे  हैं  हमारा  अपमान 
आदर्शों  को  ताक  पे  रखकर 
राह  की  मुश्किलों  से  लड़कर 
जिनको  शिखर  तक  पहुँचाया  
वे  ही  सागर  की  गर्तों  में 
हमें पहुँचाने  चले  हैं  आज .

23/07/02

मधु...

ज़िन्दगी  का  सौदा  कर                       
मैं  मधुशाला  हो  आया  हूँ .
चरणामृत  समझकर  कुछ (मधु )
साथ  ले  आया  हूँ 
आते  जाते  सबसे  कहता 
कुछ  तुम  लो , कुछ  ले  जाओ 
खुश  रहो  खुद  भी  पीकर  
और  दूसरों  को  पिलाओ 
ख़ुशी  सिमटते  नहीं  सिमटती 
कैसे  कह  दूँ  क्या  पाया  हूँ 
ज़िन्दगी  का  सौदा  कर 
मैं  मधु  पी  आया  हूँ .



24/07/02

मेरा जहाज़ ...

पानी  की  एक-एक  बूँद , जुडकर बना  समंदर 
उस  समंदर  पर  मेरा  जहाज़ , डोलता  इठलाता 
चलता  है  इधर  से  उधर , समेटे  हुए  हमें
एक  शरीर  जैसे  आत्मा  को  लेकर 
एक  एक  आदमी  से  बने  इस  संसार  में 
कभी  पता  है  शांति , सुख  इस  गहराई  में , और 
कभी  गुस्सा  और  अशांति  उन  लहरों  से ...
व्याकुल  होता  है  प्रिया  रुपी  नदी  से  मिलने  पर 
सांसें  लेता  है  ज्वार  भाटों  सी 
देता  है  शरण  जैसे  सीप  का  मोती ...


wife...

"O!! my love, how i cherish this pain,
which came to me as a parting gift, only to gain
more of your love, caring, prayers and the wings
nothing the void of my life could bring....

before you, i stood no chance,
in this world as in a dance....
all alone without your troupe,
I feared to loose in the group, my prayers
Answered and blessed was I, with you in my life,
an ensemble, a companion a beautiful wife..."

Inspiration...

A road, untouched, untraveled..
Paved neat and quite
Flanked with fields, lit up bright..
Built by one but Travelled by all,
Those rising high or taking the fall
Intriguing and reaching for life
Taking the men away their strife
A swell of clouds on thy sky...
I see it all through your eyes...

Twirl and twitch of waves,
Flaring from face
Tell you it’s there...
Whispers crashing now and then
Drape glistens as you near
You wonder how long u got to wait,
To see the end then catch a bait...
To rest, a shadow or two appear,but
The road embraces, as to a dear.
Never to stop, your heart cries,
I see it now in your eyes....