Wednesday, December 8, 2010

सपनो की बात ....



सपनो  में  अ  कर  छु  जाती  है .
होती  है  वो  बात  जो  नहीं  हो  पाई  है ...

सीने  में आज  भी  दबे  हुई  हैं  अरमान  
आग  जैसे  बुझ  के  अभी  ठंडी  नहीं  हुई  है .
उम्मीद  की  रख  के  नीचे  आज  भी  हैं  अंगारे ,
कुछ  सुलगे  हुए  कुछ  जलने  के  इंतज़ार  में ..

समय  का  एक  झोंका  आता  है  उठ  कर  कहीं  से ,
और  ले  आता  है  उनकी  एक  याद  ..
हटा  देता  है  जले  हों  को ,
निकल  लता  है  दबी  हुई  बात 

कोशिश  कर  चुका  हुईं  मैं  बहुत  पर ,
छलक  जाते  हैं  जैसे  सपने  भरी  हुई  गगरी  से ..
अपने  को  पाटा  हूँ  उनके  करीब  ,
देखा  करते  था  जिनको  दूर  से  ही ,
सिहरन  दौड़  जाती  थी  आँख  मिलते  ही ..
हर  बार  यही  सवाल  दोहराता  था ,
मिलेगी  क्या  मुझे  वो  जिसको  मैं  चाहता  था ?
और  आज  तक , सवाल  का  जवाब  सिर्फ  सपनो  में  मिला  है 
होती  वो  बात  है  जो  नहीं  हो  पाई  है ..



9-9-06
cvs
rkb



No comments:

Post a Comment