सपनो में अ कर छु जाती है .
होती है वो बात जो नहीं हो पाई है ...
सीने में आज भी दबे हुई हैं अरमान
आग जैसे बुझ के अभी ठंडी नहीं हुई है .
उम्मीद की रख के नीचे आज भी हैं अंगारे ,
कुछ सुलगे हुए कुछ जलने के इंतज़ार में ..
समय का एक झोंका आता है उठ कर कहीं से ,
और ले आता है उनकी एक याद ..
हटा देता है जले हों को ,
निकल लता है दबी हुई बात
कोशिश कर चुका हुईं मैं बहुत पर ,
छलक जाते हैं जैसे सपने भरी हुई गगरी से ..
अपने को पाटा हूँ उनके करीब ,
देखा करते था जिनको दूर से ही ,
सिहरन दौड़ जाती थी आँख मिलते ही ..
हर बार यही सवाल दोहराता था ,
मिलेगी क्या मुझे वो जिसको मैं चाहता था ?
और आज तक , सवाल का जवाब सिर्फ सपनो में मिला है
होती वो बात है जो नहीं हो पाई है ..
9-9-06
cvs
rkb
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