Wednesday, December 8, 2010

मौत ...

सत्य  को  असत्य  में  परिवर्तित  कर 
कब  तक  छुपेगा  मनुष्य 
वोह  तो  आएगी , एक  पल  में  कब 
बिना  आहत , अपने  मंज़र  छोड़  जाने  के  लिए 
भागता  रहेगा  जिससे  हर  पल 
इस  भौतिक  संसार  की  खुशियों  में , बन्धनों  में 
गोते  लगा  रहा  होगा 
तब  वहीँ  पर  अपने  संग  डूबा  ले  चलेगी ...





08/07/2005

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