सत्य को असत्य में परिवर्तित कर
कब तक छुपेगा मनुष्य
वोह तो आएगी , एक पल में कब
बिना आहत , अपने मंज़र छोड़ जाने के लिए
भागता रहेगा जिससे हर पल
इस भौतिक संसार की खुशियों में , बन्धनों में
गोते लगा रहा होगा
तब वहीँ पर अपने संग डूबा ले चलेगी ...
08/07/2005
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