Wednesday, December 8, 2010

तुम्हीं तुम हो ...

उस  खुदा  से  मेरी 
तुम्ही  रज़ा  हो , हर  आरज़ू  तुम  हो 
मेरा  हर  गम  बस  तुम्ही  तक , मेरी  हर  ख़ुशी  तुम्ही  हो 
मेरे  साथ  चलना , मेरा  साथ  देना , मेरी  कश्ती  तुम्ही  हो ....

वक़्त  ने  छीने  अपने  बहुत , और  कई  आरमान  मेरे 
उन  साबका  लौटाया  हुआ ..
सिला  तुम  हो , महफिल  तुम्ही  हो 
बस  मुझे  ही  देखो , मुझे  ही  सोचो , मेरा  साहिल  तुम्हीं  हो ....

थे  गम  के  बादल   फलक  पर  और  हवा  तन्हाई  सी  सर्द 
मिटाया  जिसने  ये 
अंधेरा  वो  तुम्हीं  हो , प्यार  की  बारिश  तुम्हीं  हो 
खुद  जलकर  राह  दिखाए  जो , मेरा  वो  आफताब  तुम्हीं  हो .....

तुम्हीं   तुम   हो  ...


28/03/10

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